शनिवार, 11 दिसंबर 2010

आसमां


आज ये आसमाँ मेरे दिल से भी छोटा है
की
मेरा दिल आसमाँ से भी ज्य़ादा रोता है

बेमौसम रोना इस दिल की फितरत है आज
के आसमाँ तो सिर्फ बारसातों में रोता है

गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

मन और मानव

मन और मानव दोनों ही तो भटक चुके
आँखों मैं जो आंसू थे पलकों में ही अटक चुके
अमानुषता के दानव जीवन को ही गटक चुके
मानवता का लहू भ्रष्टाचारी सटक चुके

बुधवार, 8 दिसंबर 2010

मैं

बहुत दिनों से देखा नहीं मैंने खुद को
शायद मैं इस दुनिया मैं कही खो गया
रास्तों ने पुकारा था भी मुझको
फिर भी मुझसे ये गुनाह हो गया

तेरी आँखों में ढूंड रहा हूँ खुद को

मैं कहाँ खो गया मैं कहाँ खो गया